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मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री

मेंरी नैनं में श्याम समाये गयो री
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,

लुट जाउंगी श्याम तेरी लटकन पे
विक जाउंगी श्याम तेरी मटकन पे

वो तो मधुर मधुर मुस्काये गयो रे
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,

मर जाउंगी श्याम तोरे अधरं पे
वारि जाउंगी श्याम तोरे नैनं पे

वो तो तिर्शी नजरियाँ चलाए गयो री,
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,

ये तो पगल को प्यारो है नन्द लाला
दीवाने पड़े जाके सब ग्वाला

जो तो सपने में वो बतलाये गयो री,
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,,,,,,,,

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