दो मुर्गे अन्य जानवरों के साथ एक फार्म पर रहते थे। एक मुर्गा बोला, “मैं सब जानवरों का राजा हूँ।”
दूसरा मुर्गा उसकी बात काटते हुए बोला, “तुम नहीं, बल्कि मैं यहाँ का राजा हूँ।” पहला मुर्गा थोड़ा समझदार था।
इसलिए वह बोला, “हम दोनों लड़ाई की प्रतियोगिता रखते हैं जो इस लड़ाई में जीतेगा वही राजा बनेगा।”
दूसरा मुर्गा सहमत हो गया। फिर लड़ाई में पहला मुर्गा जीत गया। जीतने के बाद पहले मुर्गे ने अपने पंख फड़फड़ा के कहा,
“आप सबने देखा हा होगा कि में कितनी बहादुरी से लड़ा हूँ। मैं तो पहले से ही जानता था कि मे दुनिया का सबसे बलवान मुर्गा हूँ।”
एक चील ने उड़ते उड़ते उस घमंडी मुर्गे की बात सुनी और नीचे आकर उस दबोचकर अपने घोंसले में ले गई।
Moral of Story
शिक्षा: घमंडी का सिर सदा नीचा होता है.
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