नन्द लाला तेरा मन काला जरा मटकी मेरी छोड़ दे
वरना मैं ला दूंगी १०० नंबर…..
रोज रोज मस्ती में छेड़े पाके मोहे अकेली
तेरे डर से सेहमी सेहमी रेहती मेरी सहेली
वनवारी सुनो गिरधारी अरे हट जा रस्ता छोड़ दे
वरना मैं ला दूंगी १०० नंबर…..
आये गी जब पुलिस ओ छलिया करेगी खूब पिटाई
वृंदावन की गली गली में होगी तेरी हसाई
मन वसिया मेरे नन्द रसिया अब हट जा रस्ता छोड़ दे
वरना मैं ला दूंगी १०० नंबर…..
छोड़ कभी न मत ले पंगा पड़ गया मेरे पीछे
जाके अपनी मुरली बजा दू बैठ कदम के निचे
तू छलिया कान्हा तू छलिया देयो बहिया मेरी मरोड़ जो
वरना मैं ला दूंगी १०० नंबर…..
श्याम मेरी अब तो पकड़ो कलाई
हूँ अकेला यहाँ नहीं कोई मेरा
मेरी बांके चलो परछाई
श्याम मेरी अब तो ………….
इस दुनिया में एक तू ही मेरा
दूजा ना कोई सहारा है
मन में विश्वास जगा कर के
मैंने तुझको आज पुकारा है
मेरी सुनके पुकार तू आजा एक बार
अब तो कर लो सुनवाई
श्याम मेरी अब तो …………….
आकर के देखो हाल मेरा
इस जग ने क्या कर डाला है
जसिको अपना समझा मैंने
उसने ही छीना निवाला है
रोटी छीनी कपडा छीना
और छीन ली मेरी कमाई
श्याम मेरी अब तो …………..
मैं तो दुनिया से हारा गया
अब तुझको ही जितवाना है
खोया सम्मान जो विक्की का
हर हाल में उसे दिलाना है
जो भी आया शरण हार कर के तेरी
तूने उसकी बिगड़ी बनाई
श्याम मेरी अब तो ……….
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