प्रगटे गोकुल कृष्ण मुरारी,
नक्षत्र रोहिणी कृष्ण अष्टमी,
भादों रात परम अंधियारी,
प्रगटे गोकुल————-
बजत बधईया नन्द अंगनवां,
गोपिन ग्वाल बजावत तारी,
प्रगटे गोकुल————–
भरि आनंद सब करत कुतूहल,
प्रेम मगन हर्षित नर नारी,
प्रगटे गोकुल—————
देवन मिलि दुंदुभी बजावत,
धरा अवतरे कंस प्रहारी,
प्रगटे गोकुल कृष्ण मुरारी—–2
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