मीराबाई (1498-1546) सोलहवीं शताब्दी की एक कृष्ण भक्त और कवयित्री थीं। उनकी कविता कृष्ण भक्ति के रंग में रंग कर और गहरी हो जाती है। मीरा बाई ने कृष्ण भक्ति के स्फुट पदों की रचना की है। मीरा कृष्ण की भक्त हैं। उनके गुरु रविदास जी थे तथा रविदास जी के गुरु रामानंद जी थे।
राम नाम रस पीजै मनुवा,
राम नाम रस पीजै
तजि कुसंग सतसंग बैठि नित,
हरि-चर्चा सुनि लीजै ।
काम क्रोध मद मोह लोभ को ,
बहा चित से दीजै ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
ताही के रंग में भीजै ।
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