सखी री मैं हु प्रेम दीवानी
कोई समजे न कोई जाने न,
तू भी रही अनजानी
सखी री मैं हु प्रेम दीवानी….
सुरत उसकी इतनी मोहनी
रंगत श्याम सलोनी
बिन देखे अखियाँ ना मानी मंद मंद मुस्कानी
सखी री मैं हु प्रेम दीवानी……
ऐसा कर दिया मुझ पे जादू,
हो गई मैं मस्तानी
प्रेम रंग में लता रंग गई सुध बुध भी न जानी
सखी री मैं हु प्रेम दीवानी……………
की मुझसे प्रीत कान्हा खोटी
कऊएं को खिलाई माखन रोटी -2
तेरी दीवानी जो ना होती
सारी उम्र वृह में ना रोती…….. -2
उद्धार मौर का कर दिया
सिर मौर मुकट धर लिया -2
की मुझसे प्रेम लीला झूठी।
कऊएं को खिलाई माखन रोटी……
जैसे बंसी अधर लगाती तू
ऐसी मुझसे प्रीत निभाती तू -2
तर जाती चरण जो लगाई होती।
कऊएं को खिलाई माखन रोटी……
राधा रानी को दुलराया
तूने मुझे कन्हईया ठुकराया -2
मुझे समझ के दास छोटी।
कऊएं को खिलाई माखन रोटी……
की मुझसे प्रीत कान्हा खोटी
कऊएं को खिलाई माखन रोटी -2
तेरी दीवानी जो ना होती
सारी उम्र वृह में ना रोती…….
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