श्याम अपने दर पे बुला लो हमें मन्दिर में वसो,
दिन रेन तेरे दाता बिन रेन तेरे दाता,
ओ मेरे दाता दर्शन तेरा ही करू
हमे अपनी शरण लेलो तेरे मंदिर में रहू
कभी आगे तेरे ना आऊ तुझे मन ही मन मैं तो ध्याऊ
हॉवे जो भूल मुझसे कभी पाके सजा खुश रहू
श्याम अपने दर पे बुला लो हमें
करो दया किरपा मुझपे इतनी तेरी ही दासी मैं बनू
प्राण रहे तन में जब तक करती सेवा मैं रहू
श्याम अपने दर पे बुला लो हमें…………..
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