रे मनवा चल वृंदावन चलिये, देख तू श्याम बुलाये रे,
श्याम बुलाये रे, मेरा घनश्याम बुलाये रे,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये…….
आया है पावन ये महीना, जन्माष्टमी आई है,
श्याम के रंग में रंग गए सब, भक्तो ने धूम मचाई है,
चलकर तू वृंदावन प्यारे, श्याम के रंग में रँगले,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये…….
सावला वो मुस्कान है मीठी,बंसी मधुर बजाए रे,
छीके से माखन को चुराकर,मस्त मगन हो जाये रे,
माखन चोर वो मुरली वाला, सबके मन को हर ले,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये…….
गोपिन संग कभी रास रचाये, कभी वो गइयाँ चराये रे,
सबको ऐसे प्यार करे, सबको अपना वो बनाये रे,
अपने प्यारे निज भगतो के सारे संकट हर ले,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये…….
भक्त रे तू भी इस जीवन को, श्याम हवाले कर दे रे,
राधे राधे जपकर तू भी, चरणों में मस्तक धर ले रे,
हो जाएगा पार ये बेड़ा, श्याम भजन तू कर ले,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये, देख तू श्याम बुलाये रे,
श्याम बुलाये रे, मेरा घनश्याम बुलाये रे,
रे मनवा चल वृंदावन चलिये…….
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