श्याम से नैना लड़ गए,
लाख मनाया मैंने इनको,
ये तो जिद पर अड़ गए,
अपनी ही ना रही खबर,
ये ऐसा पागल कर गए,
श्याम से नैना लड़ गए,
प्रभु से नैना लड़ गए,
कान्हा से नैना लड़ गए,
प्रभु से नैना लड़ गए………
प्रीत में उनकी जग को भुलाया,
ना जाने क्या रोग लगाया,
और कोई ना दिल को जचता,
साँवरिया नैनन में समाया,
इनकी हालत क्या बतलाऊँ,
हद से आगे बढ़ गए,
अपनी ही ना रही खबर,
ये ऐसा पागल कर गए…….
पीड़ मेरी मेरे श्याम ने जानी,
मीरा जैसी हुई मैं दीवानी,
नैनों से क्या जादू चलाया,
रोम रोम में श्याम समाया,
समझ ना आए मुझको,
हाय हालत ऐसी कर गए,
अपनी ही ना रही खबर,
ये ऐसा पागल कर गए…..
बाँकी अदा और लट घुंघराले,
कजरारे नैनन हैं काले,
नींद चुराई, चैन चुराया,
मोहन के हैं रंग निराले,
सुध बुध अपनी खो बैठे हैं,
जबसे प्रीत में पड़ गए,
अपनी ही ना रही खबर,
ये ऐसा पागल कर गए||
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