नी मैं रल भगता नाल गावा श्यामा जी तेरिया आरतिया
हाथ मेरे में गंगा जल गड़वी,
मैं श्याम दे चरन धुलावा श्यामा………..
हाथ मेरे में चन्दन रोली,
मैं श्याम जी नु तिलक लगावा श्यामा……….
हाथ मेरे में फूलों वाली माला,
मैं श्याम जी नु हार पहनावा श्यामा…………
हाथ मेरे में माखन मिश्री,
मैं श्याम जी नु भोग लगावा श्यामा…………
संग श्याम दे राधा विराजे,
मैं जोड़ी तो वारे वारे जावा श्यामा…………
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे ढूँढूँ रे सांवरिया
कान्हा – कान्हा रट के मैं तो हो गई रे बावरिया
बेदर्दी मोहन ने मोहे फूँका ग़म की आग में
बिरहा की चिंगारी भर दी दुखिया के सुहाग में
पल-पल मनवा रोए छलके नैनों की गगरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
आई थी अँखियों में लेकर सपने क्या-क्या प्यार के
जाती हूँ दो आँसू लेकर आशाएं सब हार के
दुनिया के मेले में लुट गई जीवन की गठरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
दर्शन के दो भूखे नैना जीवन भर न सोएंगे
बिछड़े साजन तुमरे कारण रातों को हम रोएंगे
अब न जाने रामा कैसे बीतेगी उमरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
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