तेरे दर्श की मैं हु प्यासी चरणों की हु दासी सुन ले फरयाद संवारे
अधरों से तेरे कान्हा सुन ली है बांसुरी की तान रे
मत वाली धुन तेरी लील ले मन में बिठा रे
मेरी सुध कैसे बुला तू घट घट का वासी
सुन ले फरयाद संवारे
साँसों की धुरी कान्हा देदी है मैंने तेरी बाट में
अब जीना मरना मेरा हुआ है कान्हा तेरे साथ में
मैं जन्मो से भटक रही हु जैसे कोई वनवासी
सुन ले फरयाद संवारे
विरहा की अग्नि कान्हा निष् दिन जलाए जीयरा सांवरे,
राधा का बना है तू तो मेरा भी बन जा इक दिन संवारे
एक बार तू मेरा होजा मैं भी हु अभिलाषी सुन ले फरयाद संवारे…….
पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…