कन्हैया काहे सताते हो कभी कंकरिया मार तोड़े मटकी हमारकभी माखन चुराते होकन्हैया काहे सताते हो कभी कंकरिया मार तोड़े मटकी हमार…… गईया चराते हो यमुना किनारे तेरे ही जैसे सखा तेरे सारेरोके रस्ता कभी चोटी खीचे कभी तुम सब को सिखाते होकन्हैया काहे सताते हो कभी कंकरिया मार तोड़े मटकी हमार….. देखा तुम्हे सब ने माखन चुरातेनटखट बड़े हो …
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