घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर घनन घनन घन घंटा वाजे… निर्मल जल की धारा में पहले आकर इश्नान करो ज्योत जलाकर मन मंदिर में अंबे माँ का ध्यान धरो वरदानी से मांगों वर तुम दोनों हाथ पसार कर रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर …
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