ना मंदिर न मस्जिद जानू ना जानू गुरुद्वारास्वर्ग से सुंदर लगता है घर में तीर्थ सारा,मनका भ्रम निकालो अब तो माटी के इंसान हैजिसने हम को जन्म दियां वही मेरी भगवान है,चल चल चल ओ साथी चल बाहर तो है अनंत दिखावा है स्वार्थ की नगरीमात पिता का सेवा ही है बस अमृत की गगरीना कुछ तेरा ना कुछ मेरा …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…