तेनालीराम को राज कृष्णदेव राय के दरबार में विशेष सम्मान हासिल था। इसलिए, उनसे जलने वालों की राजमहल में कमी न थी। एक समय की बात है, विजयनगर राज्य के हालात अच्छे न थे। राज्य पर पड़ोसी देश के हमला करने का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे समय में एक दरबारी ने सोचा कि महाराज को तेनालीराम के खिलाफ भड़काने …
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