फोड़ दयी क्यों मोरी मटकिया।राह में चलते चलते॥कान्हा फोड़ दयी रेमटकी फोड़ दयी रे।। ओ मनमोहन मुरली वाले,हमको छेड़ो ना।जाने दे पनघट पे मोहे,मटकी फोड़ो ना।क्यूं तकरार करे मनमोहनराह में चलते चलते।कान्हा फोड़ दयी रेमटकी फोड़ दयी रे।। खींच ना चूनर मोरी संवरिया,चूड़ी तोड़ो ना।भोली भाली मैं हूँ गुजरिया,बहियाँ मरोड़ो ना,तीर चलाये क्यों नैनन के,राह में चलते चलते।कान्हा फोड़ दयी …
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