सरस सुपावन शक्ति हे …तेजोमयी अपार हे आनंद स्वरूपणी….मम हृदय कर उज्जियार जय माँ …..जय माँ …. अराधन तेरा करूं …निशदिन ,आठों याम घट अंतर शक्ति जगे …गाऊं तब शुभ नाम जय माँ …..जय माँ …. पत्तित-पावनी मात हे ….बालक शरण तिहार मंगलमय वरदान दे ..यही विनती बारम्बार .. जय माँ …..जय माँ .. saras supaavan shakti he … …
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जगजननी जय जय
जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय! भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा। सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी .. आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी। अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी .. अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी। कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी .. तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया। मूल प्रकृति, विद्या तू, तू …
Read More »तीन ज्ञानवर्धक प्रेरक प्रसंग
प्रेरक प्रसंग १ – स्वर्ग- नरक शास्त्रों में निपुण, प्रसिद्ध ज्ञानी एवं प्रख्यात संत श्री देवाचार्य के शिष्य का नाम महेन्द्रनाथ था। एक शाम महेन्द्रनाथ अपने साथियों के साथ उद्यान में टहल रहे थे। और आपस में वे किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। चर्चा का विषय था- स्वर्ग-नरक। किसी एक साथी ने महेन्द्रनाथ से पूछा- “क्यों मित्र! क्या …
Read More »माँ की ममता
एक छोटेसे कसबे में समीर नाम का एक लड़का रहता था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बड़ी दयनीय थी, समीर की माँ कुछ पढ़ी-लिखी ज़रुर थीं लेकिन उतनी पढाई से नौकरी कहाँ मिलने वाली थी सो घर-घर बर्तन मांज कर और सिलाई-बुनाई का काम करके किसी तरह अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा …
Read More »सोच बदलो , देश बदलेगा (Change thinking, change country)
एक माँ 6 साल के बच्चे को पीटते हुए बोली, “नालायक, तूने नीची जात के घर की रोटी खायी, तू नीची जात का हो गया तूनेअपना धर्म भ्रष्ट कर लिया। अब क्या होगा? ……. बच्चे का मासूम सवाल : माँ, मैने तो एक बार ही उनके घर की रोटी खाई, तो मैं नीची जात का हो गया । लेकिन वो लोग …
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