एक राजधानी में एक भिखारी सड़क के किनारे बैठ कर बीस-पच्चीस वर्षों तक भीख मांगता रहा। फिर मौत आ गई, फिर मर गया। जीवन भर यही कामना की कि मैं भी सम्राट हो जाऊं। कौन भिखारी ऐसा है जो सम्राट होने की कामना नहीं करता? जीवन भर हाथ फैलाए खड़ा रहा रास्तों पर। लेकिन हाथ फैला कर, एक-एक पैसा मांग कर …
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राम भक्त ले चला रे राम की निशानी
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि सादर भारत शीश धरी लीन्ही राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊँ, अँखिओं में पानी । शीश खड़ाऊ ले चला ऐसे, राम सिया जी संग हो जैसे । अब इनकी छाव में रहेगी राजधानी, राम भक्त ले चला रे राम की निशानी ॥ पल छीन लागे सदिओं जैसे, चौदह वरष कटेंगे …
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