हरि-हर, शिव-विष्णु एक ही आदिशक्ति के दो स्वरुप, एक पालन करते हैं, दूसरा नवसृजन के पहले विनाश करते हैं। सृष्टि की यही कार्यप्रणाली स्थापित की गई है। एक ही दिव्य ज्योति से दोनो ही प्रकट हुए हैं। दोनो में न कोई भेद है और न ही कोई अंतर। भगवान विष्णु को भजे बिना शिव प्रसन्न नहीं होते और महादेव के …
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