फूल पर हँसकर अटक तो, शूल को रोकर झटक मत, ओ पथिक ! तुझ पर यहाँ अधिकार सबका है बराबर ! बाग़ है ये, हर तरह की वायु का इसमें गमन है, एक मलयज की वधू तो एक आँधी की बहन है, यह नहीं मुमकिन कि मधुऋतु देख तू पतझर न देखे, कीमती कितनी कि चादर हो पड़ी सब पर …
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चलोरे मान श्री वृंदावन धाम
रतअंगे राधे राधे राधे नाम….. मिलेंगी कुंज बिहारी, ऊड़की का वार्तरी मिलेंगी बाकी बिहारी, ऊड़की का वार्तरी प्रात होट्ू हम सिर यमूनाजी जाएँगी..2 करे स्नाह हम जीवन सफल बनाएँगे होई साब मान के पूरण काम ||रतअबगे|| श्री गोवर्धन रूप के दर्शन पाएँगे..2 परिक्रमापे जीवन सफल बनएँगे करी मंसैई गंगा स्नान ||रतअंगे|| श्री बरसनो गौवंकि महिमा न्यारी है…2 महलांको साकार श्री …
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