वृषभान की दुलारी मेरी और भी निहारोमैं हु शरण तिहारी अपनी शरण लगा लोवृषभान की दुलारी मेरी और भी निहारो कोई नही है मेरा इक आसरा तुम्हाराउसे मिल गई है मंजिल जी को दिया सहारा,मजधार मेरी नैया भव पार तुम उतारोवृषभान की दुलारी मेरी और भी निहारो कोई न जग में दूजा तुसा हे श्यामा प्यारी,हे करुना मई किशोरी तेरी …
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