विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में कलाकारों का बड़ा सम्मान था। उनके दरबार में संगीतकारों, गीतकारों, कवियों और नर्तकों का तांता लगा रहता था। वो सभी दरबार में अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन करते थे और इसके बदले उन्हें पुरस्कार दिया जाता था। महाराज किसी भी कलाकार को कोई भी पुरस्कार या धन राशि देने से पहले तेनालीराम से …
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