आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम-2 तन मन धन वारुंगी सर्वस्व, हे प्रीतम सुखधाम,हे प्रीतम सुखधाम,आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम….. नवशत साज-श्रृंगार चाव सु थारी बाट निहारु,आओं तो करुणेश तेरों पथ, केश न संग बुहारू,कर करके मनुहार अपन को, पद पद मन पे वारूँ,चरण चिन्ह रज मल मल अपने, मस्तक भाग्य निखारुं,नैना तरस रहे हैं मेरे, हे नयन अभिराम,हे …
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