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Tag Archives: bharat ji

रामायण में भोग नहीं, त्याग है

रामायण में भोग नहीं, त्याग है*भरत जी नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं।**एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?**मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं ।नीचे बुलाया गया ।**श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे …

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