एक बार संत कबीर से किसे ने पूछा, आप दिनभर कपड़ा बुनते हैं तो भगवान का स्मरण कब करते हैं? कबीर उसे लेकर झोपड़ी से बाहर आ गए और कहा कि यहां खड़े रहो। तुम्हारे सवाल का जबाव शायद में न दे सकूं, लेकिन उसे दिखा सकता हूं। कबीर ने दिखाया कि एक औरत पानी की गागर सिर पर रखकर …
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अनुपम रूप नीलमणि को री
अनुपम रूप, नीलमणि को री उर धरि कर करि हाय! गिरत सोई, लखत बार इक भूलेहुँ जो री प्रति अंगनी छवि कोटि अनंगनी, सुषमा सुधा सार रस बोरी जिन हीन अंगनी नैनन निरखत, तिनहिन कहाँ कहा सरस बड़ो री नख-सिख लखि सखी! अंखियन हूँ ते, पल पल तलफति देखन को री कहा ‘कृपालु गागर मह सागर, आव न यतन करोड़ …
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