किसको पता है कब ये हंसाबंद पिंजरे को छोड़ेहरी हरी रट मनवा रेदिन रहे गए थोड़े ……… तू माटी का एक खिलौनाटूट के आखिर माटी होनाफिर क्यों बोझा पाप का धोनाभजन से मैले मन को धोना जनम मरण बंधन को तो बसएक भजन ही तोड़ेहरी हरी रात मनवा रेदिन रहे गए थोड़े ……… दो दिन जग में खावो दानाफिर ये …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…