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Tag Archives: hindi khaniyan

दान का महत्व !!

एक बहुत प्रसिद्ध संत थे जिन्होंने समाज कल्याण के लिए एक मिशन शुरू किया |जिसे आगे बढ़ाने के लिए उन्हें तन मन धन तीनो की ही आवश्यक्ता थी| इस कार्य में उनके शिष्यों ने तन मन से भाग लिया और इन कार्य कर्ताओं ने धन के लिए दानियों को खोजना शुरू किया | एक दिन, एक शिष्य कलकत्ता पहुँचा | …

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मूर्तियों में नहीं इन्सानों में भगवान ढूंढ़ो !!

एक बार एक आदमी अपने 5 साल के बेटे को पहली बार मंदिर लेकर जाता है। जब वो  दोनों मंदिर पहुंचते हैं तो मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ अपंग और लाचार लोग बैठे होते हैं जिन्हें आते जाते कुछ लोग पैसे तो कुछ लोग खाना दे देते हैं और ज्यादातर लोग उन्हें अनदेखा करके आगे बढ़ जाते हैं।   बच्चा जब …

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एक कायर आदमी की कहानी !!

100 साल पहले की यह कहानी है। एक गांव में एक आदमी रहा करता था उसकी हरकतो और उसके स्वभाव के कारण गांव वालों ने उसे कायर का नाम दिया हुआ था। कोई भी व्यक्ति उसे उसके नाम से नहीं बल्कि कायर कहके ही बुलाता था! वो खुद भी इस बात से काफी ज्यादा परेशान हो गया था इसलिए उसने …

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कर्म करों फल की चिंता ना करों !!

जमीन में दो बीज बोये गए थे अब उनके अंकुरित होकर धरती के ऊपर आने का वक्त था तभी एक बीज ने सोचा कि पता करते हैं धरती के ऊपर का जीवन कैसा हैं ? उस बीज ने कई पौधों और वृक्षों से बात की और एक निष्कर्ष निकाला कि धरती के ऊपर का जीवन बहुत कष्टदायी हैं | धरती …

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कैसे किया माता-पिता ने अपने पुत्रो का मार्गदर्शन !!

एक राजा  और रानी  थे, जिनकी प्रजा बहुत खुश थी, राजा-रानी ने सदैव प्रजा के हीत में कार्य किये | उनके दो पुत्र थे लव एवम कुश | दोनों के विचारों में बहुत मतभेद था जिस कारण वे दोनों सदा ही लड़ते रहते थे, दोनों बहुत बलवान एवम गुणी थे, लेकिन उनकी आपसी लड़ाई, राजा रानी के लिए चिंता  का विषय …

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घट-घट में राम !!

संत कबीरदास प्रायः गाया करते थे, कबिरहिं फिकर न राम की घूमत मस्त फकीर। पीछे-पीछे राम हैं, कहत कबीर-कबीर। कबीर के एक शिष्य ने कहा, ‘गुरुजी जब भगवान् राम आपके पीछे पीछे घूमते हैं, तो क्यों न हमें भी एक बार उनके दर्शन का सौभाग्य मिले।’ कबीरदास ने हँसकर कहा, भैया, भगवान् उसे ही दर्शन देते हैं, जो दुर्व्यसनों से …

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सौंदर्य क्षण भंगुर है !!

आम्रपाली अपने जमाने की अपूर्व सुंदरी, कुशल गायिका और नर्तकी थी। राजकुमार बिंबिसार से उसने प्रेम विवाह किया था। राजमहल में उसे अपमान के घूँट पीने पड़े। वह वैशाली नगर के बाहर एक आम्र वन में पुत्र जीवक के साथ रहकर संगीत-साधना में रत रहा करती थी। एक दिन आम्रपाली पुत्र के साथ भगवान् बुद्ध के दर्शन के लिए पहुँची। …

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समय का मोल !!

जगद्गुरु शंकराचार्य हमेशा लोगों को यही सीख देते थे कि अपने समय को अच्छे कार्यों में लगाओ। आदमी को कभी भी समय का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। एक बार एक धनवान श्रद्धालु ने कहा, ‘महात्मन्, अगर कोई व्यक्ति समय की कमी के कारण अपना समय अच्छे कार्यों में न लगा पाए, तो उसे क्या करना चाहिए? शंकराचार्य ने उस व्यक्ति …

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सत्य पर अटल !!

जाबालि मुनि भगवान् श्रीराम से प्रश्न करते हैं, ‘राष्ट्र किस तत्त्व पर आधारित है?’ प्रभु श्रीराम कहते हैं, ‘तस्मात् सत्यात्मकं राज्यं सत्ये लोक: प्रतिष्ठितः। अर्थात् राष्ट्र सत्य पर आश्रित रहता है। सत्य में ही संसार प्रतिष्ठित है। हे मुनि, जिस राष्ट्र की नींव सत्य और संयम पर आश्रित है, उसका शासक व प्रजा हमेशा सुखी रहते हैं। असत्य-कपट का सहारा …

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प्रेम और भक्ति !!

भगवान् श्रीकृष्ण को देखते ही सब उन पर मोहित हो जाते थे। एक दिन बलराम सहज ही में पूछ बैठे, ‘आपके पास ऐसी कौन सी विद्या है, जो सबका मन मोह लेती है। सखा व गोपियाँ ही नहीं, पशु-पक्षी भी आपके पास आने को लालायित रहते हैं। मनसुखा हँसकर बीच में बोला, भैया! कन्हैया कोई जादू जानते हैं । गायें …

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