हमने आँगन नहीं बुहारा, चँचल मन को नहीं सम्हारा,“कैसे आयेंगे भगवान xll” हर कोने कल्मष कषाय की, लगी हुई है ढेरी।नहीं ज्ञान की किरण कहीं है, हर कोठरी अँधेरी।आँगन चौबारा अँधियारा ll, “कैसे आएँगे भगवान xll”हमने आँगन नहीं बुहारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हृदय हमारा पिघल न पाया, जब देखा दुखियारा।किसी पन्थ भूले ने हमसे, पाया नहीं सहारा।सूखी है करुणा की धारा ll, “कैसे …
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