कभी फ़ुर्सत हो धनवानों से,तो श्याम मेरे घर आ जाना,इस निर्धन की कुटिया में,एक शाम ओ श्याम बिता जाना,कभी फ़ुरसत हो धनवानों से,तो श्याम मेरे घर आ जाना। मैं निर्धन हूँ मेरे पास प्रभु,चूरमा मेवा ना मिठाई है,सोने के सिंघासन है तेरे,मेरे घर धरती की चटाई है,यहीं बैठके लख दातार मुझे,तुम अपनी कथा सुना जाना,कभी फ़ुर्सत हो धनवानों से,तो श्याम …
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