कहाँ पे हैं मेरे घनश्याम राधा रो रो कहती हैराधा रो रो केहती है के राधा रो रो केहती हैसताए उनकी वो मुस्कान राधा रो रो केहती है,कहाँ पे हैं मेरे घनश्याम राधा रो रो कहती है वो मुरली याद आती हैयो राधा को सताती हैना जाने है कहा गिरधर अब नही नींद आती हैरुलाये तन से निकले प्राण राधा …
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