तेरे दर आने जो ये दिल मेरा तडपता है,कैसे दिल को प्रभु सम्बाले ये मचलता है,लाख समजाने पे ये दिल नही समझता है,कैसे दिल को प्रभु सम्बाले ये मचलता है, तेरी गलियों में फिर से आना हैफिर वही महफिले सजाना है,प्रेमियों का याहा वो प्यार मिलाजब भी चाहा तेरा दीदार मिलाउसी दर पे मेरा ये दिल प्रभु बेहलता है,कैसे दिल …
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