कलियुग का एक पुनीत (पवित्र) प्रताप यह है कि इसमें मानसिक पुण्य तो फलदायी होते हैं, परंतु मानसिक पापों का फल नहीं होता । ‘पुनीत प्रताप’ इसलिए कहा गया है कि जिस प्रकार सत्ययुग, त्रेता और द्वापर में मानसिक पापों के भी फल जीवों को भोगने पड़ते थे उस प्रकार कलियुग में नहीं होता । यहीं कलि की एक विशेषता …
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अंजनी के लाला हुँने तुमसे यह अरज लगाई
अंजनी के लाला हुँने तुमसे यह अरज लगाई, बेगा सा कार्लो सुनवाई, म्हारी बेगा . कार्लो सुनवाई, रघुवर के बाला तुमने काम बनाए, सीता का पता लगाया, संजीवन लाए, जान- जान के प्यारे, सियाराम के दुलारे, पूजेगी दुनिया सारी चरण तुम्हारे, हुँने भी श्री चर्नो मेी, बालाजी अरज लगाई, म्हारी बेगा सा कार्लो सुनवाई, अंजनी के लाला हुँने तुमसे यह …
Read More »जिट्नी वेल के सब साथी, यह हारे का सहारा
जिट्नी वेल के सब साथी, यह हारे का सहारा, ऐसा श्याम हुमारा, जिसकी नैया इसने थामी, भाव से पार उतरा, ऐसा श्याम हुमारा, जिट्नी वेल के सब साथी, यह हारे का सहारा, ऐसा श्याम हुमारा, जिसके संग मेी हो कन्हैया, उसकी ना डूबे नैया, मझधार भी क्या कर लेगा, जब साथ हो ऐसा खेवैीया, इसकी कृपा से ही चलता, हम …
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