कान्हा मेरा चितचोर है चुराया मेरा मनछीना है दिल का चैन बन गई मैं जोगन,कान्हा मेरे मनमीत है वो ही मेरे प्रीतम,बंधी शयामल से डोर टूटे न बंधन,श्याम तो सब के प्रीत है क्यों लड़ती हो सखियन,श्याम वसे हर दिल में फिर काहे की उलझन, सवाली सूरत श्याम की लागे अति सुंदरम,जाऊ मैं तुझपे वारि मेरे मनमोहन,बलिभारी मैं श्याम पे …
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