माकन बरसाने की राधा तू नन्द गाव वाला सेमैं गोरी गोरी गुजरी तू घना काला से, तू मटकी भी फोड़े दुःख सेहवे गोपियाँजब कपड़े उठावे चुप रेह वे गोपियाँ,छोटी सी उमर में तू चोरी करे सेमैं गोरी गोरी गुजरी तू घना काला से, रोज रोज कान्हा तू तो माखन चुराएपूरा नन्द परेशान तू तो सब को सताएघर घर जाके वैरी …
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