वैष्णव देवी माँ शेरावाली दुखिओं की करती है रखवाली भोग न मांगू, मोक्ष ना मांगू, धन दौलत कुछ भी ना जानू तुम कहलाती हो हिमालय सुपुत्री, ममता प्यार मांगू मतवाली नव रूपों में, नव कल्पना में, नव रसों में, नव ग्रहों में सृष्टि की रचना तेरी दृष्टि से, लालन पालन करती मेहरा वाली काल नाशिनी, दुःख हारिणि, शूल धारिणी, सिंह …
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ॐ जय महावीर प्रभु
ॐ जय महावीर प्रभु, स्वामी जय महावीर प्रभु । कुण्डलपुर अवतारी, चांदनपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभु ॥ सिध्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी । बाल ब्रह्मचारी व्रत, पाल्यो तप धारी ॥ आतम ज्ञान विरागी, सम दृष्टि धारी । माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी ॥ जग में पाठ अहिंसा आप ही विस्तारयो । हिंसा पाप मिटा कर, सुधर्म परिचारियो ॥ …
Read More »माधुर्य रस में
श्रीकृष्ण में निष्ठा, सेवाभाव और असंकोच के साथ ममता एवं लालन भी रहता है । मधुर रस में पांचों रस हैं, जिस प्रकार आकाशादि भूतों के गुण क्रमश: अन्य भूतों से मिलते हुए पृथ्वी में सब गुण मिल जाते हैं, इसी प्रकार मधुर रस में भी सब रसों का समावेश है । रस रूप श्रीकृष्ण की लीलाएं माधुर्य रस में …
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