मन है व्याकुल नैन से जल हैकैसी कठिन विधाई होसूरज के संग डूब रहा मनकैसी वेला आई कृष्ण की बाते कृषण की लीला जाए न बिसराईबाबा बाबा की बेह प्रतिध्वनीप्रति पल पड़े सुनाई, कडवे विष से भी ये बड कर कडवी येह सचाई होजिस के मोह में सब कुछ भुला थी बेह वसतू पराई वो,,,,,,,,,, मेरी बस एक ख्वाहिश है,चाहे …
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