मत फोड़ गगरिया मोरी,समजावे राधा तोरी,कान्हा मान जाओ नसांवरियां यमुना पर काहे मटकियाँ फोड़ दी मोरी मैं बरसाने की राधा तू गोकुल का है ग्वालातेरा मेरा मेल नही है मैं गोरी तू काला,फिर थामे कलियाँ मोरी मोसे कर न जोर जोरीतरस अब कुछ तो खाओ नसांवरियां यमुना पर काहे मटकियाँ फोड़ दी मोरी काहे सतावे मुझको रुलावे छेडे बीच डगरियाटूटे …
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