एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढ़क रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था। दिन पर दिन अनुशासनहीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था। नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी। जो थोड़े बहुत होशियार मेंढ़क निकलते थे वे पढ़-लिखकर अपना …
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तो इसलिए महामना प्रार्थना पत्र पर लिख देते थे क्षमा
बनारस कहें या काशी यहां के काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के कुछ ही समय बाद की बात है। कभी-कभी जब अध्यापक उद्दंड छात्रों को उनकी गलतियों के लिए आर्थिक दंड दे दिया करते थे। मगर छात्र दंड माफ कराने मदन मोहन मालवीय जी के पास पहुंच जाते और महामना माफ भी कर देते थे। यह बात शिक्षकों …
Read More »दर का भिखारी शम्बू मुझे ठुकराना ना
दर दा भिखारी शम्बू, मैनू ठुकरावीं ना । जग ने रुलाया शम्बू, तू वी रुलावी ना ॥ चाँद ते सितारे तेरी आरती उतारदे, गांदे ने गीत भोले नित्त तेरे प्यार दे । दासां तो उदास होके, दर तों उठावी ना, जग ने रुलाया शम्बू, तू वि रुलावी ना ॥ धी पुत्त सो सो गलतीयां करदे, माँ बाप ज़रा वी ना …
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