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Tag Archives: motivatonal story for kids

माँ का स्नेह!!

जब हम छोटे थे तब माँ रोटियां एक स्टील के कटोरदान में रखा करती थी। रोटी रखने से पहले कटोरदान में एक कपडा बिछाती वो कपडा भी उनकी पुरानी सूती साड़ी से फाड़ा हुआ होता था।वो कपडा गर्म रोटियों की भाप से गिरने वाले पानी को सोख लेता था, जैसे माँ की साड़ी का पल्लू सोख लेता था, हमारे माथे …

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प्रेम व करूणा ईश्वरीय गुण है!!

अहंकार, प्रेम का अभाव है, जो प्रेमपूर्ण है, प्रेममय है, वह कभी अहंकारी नहीं हो सकता। प्रेम, करूणा के अभाव के कारण भीतर का ख़ालीपन पैदा होता है, यानि जो चित्त प्रेम व करूणा से शून्य होगा, वो एक दम ख़ाली होगा।और भीतर के ख़ालीपन को भरने के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए ही, तो अहंकार उस ख़ालीपन को …

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चोरी की सजा!!

जब  ज़ेन  मास्टर  बनकेइ  ने  ध्यान करना  सिखाने   का  कैंप  लगाया  तो  पूरे  जापान  से  कई  बच्चे  उनसे  सीखने  आये .  कैंप  के  दौरान  ही  एक  दिन  किसी  छात्र  को  चोरी  करते  हुए  पकड़  लिया  गया . बनकेइ  को  ये  बात  बताई  गयी  , बाकी  छात्रों   ने  अनुरोध  किया  की  चोरी  की  सजा  के  रूप में इस  छात्र   को  कैंप  से  …

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भूत की कहानी : भूतिया कुर्सी!!

सालों पहले रामनगर गांव के पास के घने जंगल में राजू नामक तांत्रिक रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर खूब घमंड था। उसका कहना था कि वो चाहे तो सभी को अपने काबू में कर सकता है। साथ ही तंत्र विद्या की मदद से किसी को जान से मारने की कला भी उसे खूब आती थी। उसी दौरान …

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भूत की कहानी : भाग्य वाले का भूत हल जोतता है!!

सुदूर एक गांव में मोहन नाम का पहलवान रहता था, जिसके पास 5 भैंसें थीं। दिनभर भैंसों की देखभाल करना और उनका दूध पीना ही मोहन की दिनचर्या थी। भैंसों का दूध पीते रहने के कारण वह काफी बलवान हो गया था। मोहन अपने बचाव और सहारे के लिए एक लोहे की छड़ हमेशा साथ रखता था। इस कारण कोई …

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भूत की कहानी : भूतिया पेड़!!

रोनक पुर नाम के एक शहर में राजा रोनकसिंह का राज हुआ करता था। वो हमेशा अपनी प्रजा के हित में कार्य किया करते थे। वहां की प्रजा बहुत खुश रहती थी। एक दिन गिद्ध आकाश में भूतिया पेड़ के बीज लेकर उड़ रहा था। जैसे ही गिद्ध रोनक पुर पहुंचा, तो उसके मुंह से एकदम बीज रोनकपुर के बीचों-बीच …

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महाकपि की सूझ-बूझ!!

कभी एक राजा के बगीचे में अनेक बंन्दर रहते थे और बड़ी स्वच्छंदता से वहाँ कूद-फांद करते थे। एक दिन उस बगीचे के द्वार के नीचे राज-पुरोहित गुजर रहा था। उस द्वार के ऊपर एक शरारती बंदर बैठा था। जैसे ही राज-पुरोहित उसके नीचे आया उसने उसके गंजे सर पर विष्ठा कर दी। अचम्भित हो पुरोहित ने चारों तरफ देखा, …

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जातक कथा: महाकपि का बलिदान!!

हिमालय के जंगल में ऐसे कई पेड़-पौधे हैं, जो अपने आप में अनोखे हैं। ऐसे पेड़-पौधे और कही नहीं पाए जाते। इन पर लगने वाले फल और फूल सबसे अलग होते हैं। इन पर लगने वाले फल इतने मीठे और खुशबूदार होते हैं कि कोई भी इन्हें खाए बिना रह नहीं सकता। ऐसा ही एक पेड़ नदी किनारे था, जिस …

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सुनहरे पँखों वाले हँस की कहानी!!

वाराणसी में कभी एक कर्त्तव्यनिष्ठ व शीलवान् गृहस्थ रहा करता था । तीन बेटियों और एक पत्नी के साथ उसका एक छोटा-सा घर संसार था । किन्तु अल्प-आयु में ही उसका निधन हो गया । मरणोपरान्त उस गृहस्थ का पुनर्जन्म एक स्वर्ण हंस के रुप में हुआ । पूर्व जन्म के उपादान और संस्कार उसमें इतने प्रबल थे कि वह …

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जातक कथा: दो हंसों की कहानी!!

बहुत पुरानी बात है हिमालय में प्रसिद्ध मानस नाम की झील थी। वहां पर कई पशु-पक्षियों के साथ ही हंसों का एक झुंड भी रहता था। उनमें से दो हंस बहुत आकर्षक थे और दोनों ही देखने में एक जैसे थे, लेकिन उनमें से एक राजा था और दूसरा सेनापती। राजा का नाम था धृतराष्ट्र और सेनापती का नाम सुमुखा …

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