सुनके पुलकित होगआय, मुरलीधर नंदलाल ||1|| माई यशोमति बांगाई, जाना के भी अंजान घाट ना जाए कृष्णा का, धोके मे कही मान भोली सूरत से किया, फल मे भाड़ा कमाल सुनके पुलकित होगआय, मुरलीधर नंदलाल ||2|| एही सोचकर मेरा प्यारा, पुत्रा ना जाए रुत स्वयं देवकी नांधन से, कहे यशोधा जुट्ट कहना हर्षित होगआय, देख अनुता जाल सुनके पुलकित होगआय, …
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