श्याम धणी जैसा बाबा,श्याम धणी जैसा। ना ऐसा दरबार,और ना ऐसा श्रृंगार,और ना है लखदातार,बाबा श्याम धणी जैसा,ओ बाबा श्याम धणी जैसा।। बाबा मेरे शीश के दानी,खाटू नगरी में बिराजे,घर घर में ज्योत जले है,दुनिया में डंका बाजे,इनकी महिमा, सबसे न्यारी,इनकी महिमा, सबसे न्यारी,पल में भरते भण्डार,ना ऐसा दरबार,और ना ऐसा श्रृंगार,और ना है लखदातार,बाबा श्याम धणी जैसा,ओ बाबा श्याम …
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