नमो-नमो विन्ध्येश्वरी, नमो-नमो जग्दम्ब । सन्त जनों के काज में, करती नहीं विलम्ब ॥ जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदि शक्ति जग विदित भवानी॥ सिंहवाहिनी जय जग माता। जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥ कष्ट निवारिनि जय जग देवी। जय जय सन्त असुरसुर सेवी॥ महिमा अमित अपार तुम्हारी। शेष सहस मुख वर्णत हारी॥ दीनन के दुख हरत भवानी। नहिं देख्यो तुम …
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