ओ श्याम जी पड़ा रहने दे,अपनी शरण में, पड़ा रहने दे,अपनी शरण में, पड़ा रहने दे,जहाँ जाऊँ भरमाऊ,कहीं चैन ना पाऊ,कुछ दिल की भी कहने दे,पड़ा रहने दे,अपनी शरण मैं पड़ा रहने दे ये दुनिया है एक पहेली,पल में बैरन पल में सहेली,मै तो चाहु सुलझाऊ,खुद उलझ ही जाऊं,उलझन से परे रहने दे, पड़ा रहने दे,अपनी शरण में, पड़ा रहने …
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