हरि मोहे पार लगावोपार लगावो भव से हरि मोहेहरि मोहे पार लगावोपार लगावो भव से….., चंचल चित मोरा उड़त फिरत हैबाँधन चाहूँ नाहि बँधत हैहो साँई हो साँई,मोरा जियरा छुड़ावो भव सेपार लगावो…., भाँति भाँति की रस्सी बनाकरबाँधा इन्द्रियों ने भरमाकरहो साँई हो साँईमेरा बंधन काँटो भव सेपार लगावो…, तुम सच्चे गुरु समरथ स्वामीमैँ मूरख कामी अज्ञानीहो साँई….हो साँई….मोहे डूबता …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…