एक बार तुलसीदास जी वृन्दावन आये वहॉ पर वह नित्य ही कृष्ण स्वरूप श्री नाथजी के दर्शन को जाते थे उस मंदिर में एक महंत थे जिनका नाम परशुराम था एक दिन जब नित्य कि तरह तुलसी बाबा दर्शन करने पहुँचे तो उनहोंने देखा कि बंशी लकुट काछनी काछे मुकुट माथ माला उर आछे प्रभु के एक हाथ में बंशी …
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