जय रघुनन्दन जय सियाराम जय रघुनन्दन जय सियाराम | हे दुखभंजन तुम्हे प्रणाम ||भ्रात भ्रात को हे परमेश्वर, स्नेह तुन्ही सिखलाते | नर नारी के प्रेम की ज्योति जग मे तुम्ही जलाते | ओ नैया के खेवन हारे, जपूं मै तुमरो नाम || तुम्ही दया के सागर प्रभु जी, तुम्ही पालन हारे | चैन तुम्ही से पाए बेकल मनवा सांझ …
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क्यों पीवे तू पानी हंसिनी
क्यों पीवे तू पानी हंसिनी,क्यों पीवे तू पानी, सागर खीर भरा घट भीतर, पीयो सूरत तानी हंसिनी, क्यों पीवे तू पानी । जग को जार धसो नभ अंदर, मंदर परख निशानी हंसिनी, क्यों पीवे तू पानी । गुर मूरत तू धार हिये में, मन के संग क्यों फिरत निमाणी हंसिनी, क्यों पीवे तू पानी । तेरा काज करे गुर पूरे, …
Read More »अनुपम रूप नीलमणि को री
अनुपम रूप, नीलमणि को री उर धरि कर करि हाय! गिरत सोई, लखत बार इक भूलेहुँ जो री प्रति अंगनी छवि कोटि अनंगनी, सुषमा सुधा सार रस बोरी जिन हीन अंगनी नैनन निरखत, तिनहिन कहाँ कहा सरस बड़ो री नख-सिख लखि सखी! अंखियन हूँ ते, पल पल तलफति देखन को री कहा ‘कृपालु गागर मह सागर, आव न यतन करोड़ …
Read More »जानम जानम से तुम हो स्वामी
मैं हूँ चरण की दासी आई शरण में हे गुरु ज्ञानी गुरु दर्शन की प्यासी…. सावन तुम हो बूँद मैं टुंरी.. सागर तुम हो ल़हेर मैं टुंरी जानम जानम… जीवन तुम हो प्राण मैं जिसकी… भजन जो तुम हो लाई हू मैं उसकी जानम जानम… रवि तो तुम हो किरण मई टुंरी…. शंकर तुम हो गाना हूँ मैं टुंरी जानम …
Read More »राम कृष्ण कहिये उठि भोर
हे राम, राम, राम राम राम, मेरे राम, मेरे रामराम कृष्ण कहिये उठि भोर राम कृष्ण कहिये उठि भोर राम कृष्ण कहिये उठि भोर राम कृष्ण कहिये उठि भोर राम राम राम कृष्ण कहिये उठि भोर अवध ईश ये धनुष धरे हैं वो बृज माखन चोर अवध ईश ये धनुष धरे हैं वो बृज माखन चोर राम, हरे राम राम …
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