शैवागम के अनुसार भगवान रुद्र के आठवें स्वरूप का नाम हर है । भगवान हर को सर्वभूषण कहा गया है । इसका अभिप्राय यह है कि मंगल और अमंगल सब कुछ ईश्वर – शरीर में है । दूसरा अभिप्राय यह है कि संहारकारक रुद्र में संहार – सामग्री रहनी ही चाहिए । समय पर सृष्टि का सृजन और समय पर …
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