सुन नाथ अरज अब मेरी,में शरण पड़ा प्रभु तेरी ,,,,, तुम मानुष तन मोहे दीन्हा,भजन नही तुम्हरौ कीन्हा,विषयों ने लई मति घेरी ,में शरण पड़ा प्रभु तेरी ,,,,, सुत दारादिक यह परिवारा,सब स्वारथ का है संसारा,जिन हेतु पाप किये ढेरी,में शरण पड़ा प्रभु तेरी ,,,,, माया में ये जीव भुलाना ,रूप नही पर तुम्हरौ जाना ,पड़ा जन्म मरण की फेरी,में …
Read More »
पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…