मेरे मन में है राम, मेरे तन में है राम । मेरे नैनो की नगरिया में राम है ॥ मेरे रोम रोम के है राम ही रमिया, साँसों के स्वामी, मेरी नैया के खिवैया। कण कण में हैं राम, त्रिभुवन में हैं राम, नीले नभ की अटरिया में राम है॥ जनम जनम का जिन से है नाता, मन जिन के …
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करुणा सुनो श्याम मेरी
हे श्याम, श्याम, श्याम, श्याम, मेरे श्याम करुणा सुनो श्याम मेरी ॥ करुणा सुनो श्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी, करुणा सुनो श्याम मेरी ॥ दरसन कारन भयी बावरी, बिरह व्यथा तन घेरी, तेरे कारन जोगन हूँगी, दूंगी नगर बिच फेरी, कुञ्ज बन हेरी हेरी, करुणा सुनो श्याम मेरी ॥ अंग बभूत गले मृग छाला, यूं तन भसम करूंगी, अजहूँ न मिल्या …
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