अपने नटखट कान्हा को मैया क्यों न समजावेतेरो कान्हा बडो हठीलो यमुना तट पे उधम मचावे कान खोल कर सुन ले मैया बिगड़ गया नन्द लालाकमरे में बंध कर के बहार लगा दे ताला, जब भूखो प्यासों रहेगो दिन भर होश ठिकाने आवेतेरो कान्हा बडो हटीलो….. पनघट में माँ तेरा लाडला करता है बरजोरी,फोड़ दी मटकी कान्हा ने बहियाँ पकड़ …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…